Sunday, May 10, 2015

प्रीति मान फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

बीबीसी एक नई श्रंखला शुरू कर रहा है- आर्टिस्ट ऐट स्टूडियो. यानी कलाकारों की ज़ुबानी उनकी रचना प्रक्रिया और कला की कहानी. इसके तहत आप चित्रकारों, संगीतकारों, साहित्यकारों और अन्य कलाओं से जुड़ी अहम शख़्सियतों को सुन पाएंगे.
जिस कोने वो अपनी कला का सृजन करते हैं, उसे देख पाएंगे. (तस्वीरें और आवाज़ उपलब्ध कराई है प्रीति मान ने).
अखिलेश चित्रकार हैं, युवा और चर्चित. भोपाल में रहते हैं. इंदौर के ललित कला संस्थान से डिग्री हासिल करने के बाद 10 साल तक लगातार काले रंग में अमूर्त शैली में काम करते रहे. भारतीय समकालीन चित्रकला में अपनी खास अवधारणा रूप अध्यात्म के कारण वे चर्चित रहे हैं.
अखिलेश के चित्रकर्म में देसी और मार्गी का विभेद नहीं बल्कि एकत्व सत्यापित और परीक्षित है. उनके रंगलोक के वृत्तान्त में यह कहना बहुत कठिन है कि वे रंगों की मातृभूमि में कब नहीं थे.
वहां रंगों में शास्त्रीय परिष्कार और गर्वीला ऐश्वर्य है तो विदग्ध लालित्य, ऐंद्रीय मांसलता और आंचलिक प्रांजलता भी. उनके वर्णपट की बहुलता का रागसिक्त रंगात्म अनन्य है पर मनुष्य-मात्र को संबोधित भी.
वह कहते हैं, "मेरे चित्र विचार से नहीं बनते, न मैं उनमें किसी विचार को आने देता हूं, न मैं ये सारी चीज़ें सोचकर चित्रित करता हूं. मैं एक खेल शुरू करता हूं और ख़ुद उसमें शामिल हो जाता हूं. परिणामस्वरूप वह चित्र होता है. जब खेल से बाहर निकलता हूं तब मेरे सामने एक चित्र होता है. ये सारे प्रयास मेरे बिलकुल नहीं. इनमें से कुछ भी मैं नहीं करता. न चेतना के स्तर पर, न विचार के स्तर पर."


http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2015/05/150506_artist_at_studio_akhilesh_ms.shtml