Saturday, June 20, 2015

बचपन में ही भा गया वायलिन


अनुप्रिया देवताले मशहूर वायलिन वादक हैं. अनुप्रिया जाने-माने कवि चंद्रकांत देवताले की बेटी हैं.

http://www.bbc.com/hindi/india/2015/06/150620_anupriya_deotale_preeti_mann_photo_feature_sr?post_id=10153334409834700_10153438434754700

Sunday, May 10, 2015

प्रीति मान फ़ोटो पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

बीबीसी एक नई श्रंखला शुरू कर रहा है- आर्टिस्ट ऐट स्टूडियो. यानी कलाकारों की ज़ुबानी उनकी रचना प्रक्रिया और कला की कहानी. इसके तहत आप चित्रकारों, संगीतकारों, साहित्यकारों और अन्य कलाओं से जुड़ी अहम शख़्सियतों को सुन पाएंगे.
जिस कोने वो अपनी कला का सृजन करते हैं, उसे देख पाएंगे. (तस्वीरें और आवाज़ उपलब्ध कराई है प्रीति मान ने).
अखिलेश चित्रकार हैं, युवा और चर्चित. भोपाल में रहते हैं. इंदौर के ललित कला संस्थान से डिग्री हासिल करने के बाद 10 साल तक लगातार काले रंग में अमूर्त शैली में काम करते रहे. भारतीय समकालीन चित्रकला में अपनी खास अवधारणा रूप अध्यात्म के कारण वे चर्चित रहे हैं.
अखिलेश के चित्रकर्म में देसी और मार्गी का विभेद नहीं बल्कि एकत्व सत्यापित और परीक्षित है. उनके रंगलोक के वृत्तान्त में यह कहना बहुत कठिन है कि वे रंगों की मातृभूमि में कब नहीं थे.
वहां रंगों में शास्त्रीय परिष्कार और गर्वीला ऐश्वर्य है तो विदग्ध लालित्य, ऐंद्रीय मांसलता और आंचलिक प्रांजलता भी. उनके वर्णपट की बहुलता का रागसिक्त रंगात्म अनन्य है पर मनुष्य-मात्र को संबोधित भी.
वह कहते हैं, "मेरे चित्र विचार से नहीं बनते, न मैं उनमें किसी विचार को आने देता हूं, न मैं ये सारी चीज़ें सोचकर चित्रित करता हूं. मैं एक खेल शुरू करता हूं और ख़ुद उसमें शामिल हो जाता हूं. परिणामस्वरूप वह चित्र होता है. जब खेल से बाहर निकलता हूं तब मेरे सामने एक चित्र होता है. ये सारे प्रयास मेरे बिलकुल नहीं. इनमें से कुछ भी मैं नहीं करता. न चेतना के स्तर पर, न विचार के स्तर पर."


http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2015/05/150506_artist_at_studio_akhilesh_ms.shtml

Wednesday, January 12, 2011

रंग बातें करें ओर बातों से खुशबू आये ....


रंग बातें करें ..... काफी अरसा पहले मैंने यह ब्लॉग बनाया । क्यूँ बनाया था अब भूल गयी , शायद उस वक़्त काफी दोस्त ब्लॉग के बारे में चर्चा करते रहते थे. इसलिए बनाया हो , वाकई याद नहीं आ रहा । आज घूमते फिरते यहाँ पहुंची तो देखा कुछ शुरू किया था ,जो अधूरा है तो पहली पोस्ट लिखने बैठ गयी । जब मैं छोटी थी , रंग मुझे बहोत आकर्षित करते थे । अब भी करते हैं ,पर भाव में फर्क है । पहले रंगों के प्रति आकर्षण था ,अब समझ है । आजकल पेंटिंग्स ओर पढने में व्यस्त हूँ। फोटोग्राफी का भी शौक रखती हूँ ,सो वो भी जारी है समयानुसार । कभी आपने रंगों को महसूस किया है । काला रंग गहरा अहसास देता है ,जैसे अभी हाथ खींच कर अपने में समा लेगा । ओर लाल रंग खुद ही छिटक के आपके ऊपर चढ़ बैठेगा, कितना भी छुटा लो वो नहीं छूटेगा . नीला कहेगा कितनी ही मुश्किलें आये तुम पार कर लोगी जैसे उसे मुझपर अथाह भरोसा है । सफ़ेद अहसास दिलाएगा मैं कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा तुम्हारे आखरी सफ़र तक । पीला अपने साथ चलने को कहेगा ,हर रंग की अपनी एक बात है ,अपनी एक कहानी । कभी महसूस किया है आपने रंगों का साथ , मैंने किया है । शायद इसीलिए सब रंग अपने अपने तरीके से जिंदगी में घुल जाते हैं । ओर मेरे अस्तित्व का हिस्सा हो जाते हैं .खैर आज तो मैं बस यह अहसास दिलाने के लिए लौटी की यह ब्लॉग अकेला नहीं है , मैं इसके साथ हूँ । ओर जब जब वक़्त मिलेगा शिरकत करती रहूंगी । पता नहीं जो कहना चाहूंगी वो आप लोगों तक पहुंचेगा या नहीं पर मेरी कोशिश यही रहेगी , की मैं कुछ ना कुछ कहती रहूँ । अगर आप सुनेगे तो मेरा कहना सार्थक होगा । फिलहाल रंगों से बातें करने का वक़्त हो चला है । फिर जल्द ही मुलाक़ात होती है । शुक्रिया