
रंग बातें करें ..... काफी अरसा पहले मैंने यह ब्लॉग बनाया । क्यूँ बनाया था अब भूल गयी , शायद उस वक़्त काफी दोस्त ब्लॉग के बारे में चर्चा करते रहते थे. इसलिए बनाया हो , वाकई याद नहीं आ रहा । आज घूमते फिरते यहाँ पहुंची तो देखा कुछ शुरू किया था ,जो अधूरा है तो पहली पोस्ट लिखने बैठ गयी । जब मैं छोटी थी , रंग मुझे बहोत आकर्षित करते थे । अब भी करते हैं ,पर भाव में फर्क है । पहले रंगों के प्रति आकर्षण था ,अब समझ है । आजकल पेंटिंग्स ओर पढने में व्यस्त हूँ। फोटोग्राफी का भी शौक रखती हूँ ,सो वो भी जारी है समयानुसार । कभी आपने रंगों को महसूस किया है । काला रंग गहरा अहसास देता है ,जैसे अभी हाथ खींच कर अपने में समा लेगा । ओर लाल रंग खुद ही छिटक के आपके ऊपर चढ़ बैठेगा, कितना भी छुटा लो वो नहीं छूटेगा . नीला कहेगा कितनी ही मुश्किलें आये तुम पार कर लोगी जैसे उसे मुझपर अथाह भरोसा है । सफ़ेद अहसास दिलाएगा मैं कभी तुम्हारा साथ नहीं छोडूंगा तुम्हारे आखरी सफ़र तक । पीला अपने साथ चलने को कहेगा ,हर रंग की अपनी एक बात है ,अपनी एक कहानी । कभी महसूस किया है आपने रंगों का साथ , मैंने किया है । शायद इसीलिए सब रंग अपने अपने तरीके से जिंदगी में घुल जाते हैं । ओर मेरे अस्तित्व का हिस्सा हो जाते हैं .खैर आज तो मैं बस यह अहसास दिलाने के लिए लौटी की यह ब्लॉग अकेला नहीं है , मैं इसके साथ हूँ । ओर जब जब वक़्त मिलेगा शिरकत करती रहूंगी । पता नहीं जो कहना चाहूंगी वो आप लोगों तक पहुंचेगा या नहीं पर मेरी कोशिश यही रहेगी , की मैं कुछ ना कुछ कहती रहूँ । अगर आप सुनेगे तो मेरा कहना सार्थक होगा । फिलहाल रंगों से बातें करने का वक़्त हो चला है । फिर जल्द ही मुलाक़ात होती है । शुक्रिया